President of India Droupadi Murmu Biography in Hindi | दुनिया बिखर गई थी लेकिन हार नहीं मानी भारत की नई राष्ट्रपति की कहानी

अगर आपको लगता हे की आपका हालत कमजोर हे बक्त सही नहीं जा रहा हे तो ये पोस्ट जरूर पढ़ना आपका जिंदगी बदल जाएगी आपका सोच बदल जाएगी अज्ज हम बात करने जा आरहे हे एक महिला की जिनका दोनों बचा थे और दोनों बचे की जबानी में उनको छोड़ के चले गए इनकी पति की भी मोत हो गय। इन्होने अंदर से टूट चुकी थी। 


President of India Droupadi Murmu Biography in Hindi

 


लेकिनआत्मबिस्वास नहीं खोने दिया जिन्होंने मैडिटेशन का सहारा लिया और लाइफ में इतना कमाल का बाउंस बैक किया की भरता का प्रथम नागरिक के रूप में चुनी जा चुकी ह। भारत की सर्बोचा पद पर अब ाशिन हो चुकी ह। तो दोस्तों आपको पता चल गया होगा आज हम जानेंगे देश की प्रथम आदिवासी महिला राष्ट्रपति प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया-द्रौपदी मुर्मू जी के बारे मे। 

द्रौपदी मुर्मू जी के प्रारंभिक जीवन - About Droupadi Murmu

श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी  20 जून 1958 को ओडिशा की पिछड़े जिले मयूरभंज के एक गरीब आदिवासी परिबार में जन्म ग्रहण किये थ। उनके पैदा होते ही समस्यांएं उनके स्वागत करने के लिए तैयार थ। परिवार गरीबी में जूझ रहा था बहत काम संसाधन में जीबन बिता रहे थ। उनका पिताजी का नाम बिरंचि नारायण टुडू था जो किम किशन थ। 

अभाबाो में और गरीबी में अपने  बचपन बिताया लेकिन स्तिति को कभी भी अपने म्हणत के आगे आने नहीं दिए मुर्मू जी अपने बचपन की सिख्या अपने गाओं की स्कूल में किया उसके बाद उन्होंने  रमादेवी  महिला महाविद्यालय में अपने ग्रेजुएशन पूरी क। पढाई कम्पलीट करने के बाद अपने बेटी को सिख्या देने के लिए खुद सिखयक बन गय। एक सिखयक के तोर पर उन्होंने अपना करियर अरविन्द स्कूल ऑफ़ इंटीग्रल एजुकेशन्स से सुरुवात की। 

द्रौपदी मुर्मू जी के परिवार - Droupadi Murmu Family

चुनोतिया इतनी काफी नहीं थी बहत सारि आगे इंतज़ार कर रहे थ। जैसे मैंने बताया की उनके जिंदगी में चुनोतिया आना अभी बाकि था संशयीं अभी ख़तम नहीं हुए थ। सब कुछ ठीक चल रहा था उसके बिच 2009  में अक्टूबर का महीना 27  तारीख सुभे के  7  बजे थे ओडिशा की राजधानी भुबनेश्वर के पत्रापड़ा इलाका में अचानक से हल चल बढ़ी एक घर में 25  साल की एक लड़का का लॉस मिली घर बाले ने हॉस्पिटल लेके गए इस उम्मीद में की सायद कुछ चमत्कार हो जाये लेकिन डॉक्टर ने कहा जान जा चूका हे। ये लड़का कोई और नहीं श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी के बीटा लक्समन मुर्मू थे। दोस्तों के साथ गए थे रात में ऑटो से घर आया थ। उनका हालत ठीक नहीं था रात में सो गए और सुभे पता चला उनके जान चले गए ।

इस रहश्य मई मृत्यु से पर्दा नहीं उठा था उसके चार साल बाद यानिकि 2013  में उनके दूसरे पुत्र की रोड एक्सीडेंट में मोत हो गया। अपने दोनों जबान बेटों की मोत से द्रौपदी मुर्मू जी उभर भी नहीं पाए क्यूंकि पति की भी जान चला गया। द्रौपदी मुरमू जीके पति 2014 में दुनिया छोड़ के चला गए जिनका नाम श्याम चरण मुर्मू थे। कहा जाता हे की उनका सरीर बीमार था और हॉस्पिटल ले जाने की रास्ते में मोत हो गय। 

श्याम चरण जी बैंक में जॉब करते थ। उनके मोत के बाद द्रौपदी मुर्मू जी के बेटी इतिश्री मुर्मू अभी ो भी बैंक में जॉब करते हे।

द्रौपदी मुर्मू जी के अध्यात्म जीबन - Droupadi Murmu News

द्रौपदी मुर्मू जी जो अंदर से टूट चुकी थी। द्रौपदी मुर्मू जी बहत कम समय में बहत कुछ खो दिए थे तो उन्होंने अपने पति की देहांत के बाद अध्यात्म का सहारा लिय। 

श्रीमती मुर्मू राजस्थान के माउंट अबू में ब्रह्म कुमारी आश्रम संसथान में जाने लगे और कई कई दिनों तक मैडिटेशन करने लगे,ध्यान करने लगे तनाब काम करने के लिए कोशिश करने लगे,उन्होंने राज योग भी सीखा और संसथान में जुड़े अनेक कार्य क्रम में हिंसा लेने लगे और अपने आप को और ताकत बनाने लगे कहने का मतलब यह है कि हालात चाहे जितने विपरीत हो जाएं आपको पहाड़ की तरह बनना है

द्रौपदी मुर्मू जी के राजनैतिक जीबन

कहा जाता हे की महिला के लिए पॉलिटिक्स में जाना बहत मुश्किल होता हे और बहत कठिन होता ह। श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का यंहा तक पहुंचना भी कोई आम बात नहीं हे ,दुनिया अज्ज इनके बारे में बात कर रहा हे क्यूंकि उनहोंने तमाम संघर्षो का सामना कि।

शुरुआती दौर में अपने पोलिटिकल करियर बीजेपी के साथ कि। ओडिशा में बीजेपी के साथ जुड़ने के बाद में 1997 में भारी जित हासिल करके रायरंगपुर पंचायत से परिषद् के पद संभाला था उसके बाद पार्टी ने उनके पैशन को देखते हुए उनको अनुसूचित जनजाति मोर्चा का वाईस प्रेजिडेंट बना दिए।

2000 से 2002 में बीजेपी और बीजेडी की जो गठबंधन की सर्कार थी इसमें उन्होंने मंत्री बानी और उसके बाद 2002 से 2004 तक फिर से ओडिशा की मंत्री बनी उसके बाद में जो कुछ हुआ आपको मालूम हे उनके पर्सनल लाइफ में उथल पुथल मचे ह।

उन्होंने मैडिटेशन की सहारा ले रही थी,अध्यत्म रस्ते पर थी एक नया जीबन की शुरुआत कर चुकी थी ,कमबैक की कहानी लिख रही थी। इस सब के बिच में 2015 से 2021 तक झारखण्ड की राज्यपाल चुना गया और 2022 में अब ो भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति चुनी जा चुकी ह। उनका सफर हमे बताता हे की जीवन में हमे सही रस्ते पे चलते रहिये आपको एक न एक दिन सफलता जरूर मिलेगा।

द्रौपदी मुर्मू जी के द्वारा विद्यालय स्थापना

आखिर सिखने बाले बात ये हे की मेमोरी से भी अप्प मोटीवेट हो सकते हे। आपकी जीबन में जो मेमोरी हे उनसे भी अप्प सिख सकते ह। श्याम चरण मुर्मू जी से कॉलेज में इनकी मुलाक़ात हुए,दोस्ती होती हे,दोस्ती प्यार में बदल जाता हे और 1980 में उनका शादी हो जाती हे।

और जैसा मैंने बताया की दोनों जबान बेटो को खो दिए अपने पति को खो दिए। इनकी जिंदगी में बुरे लम्हे भी आये लेकिन उन्होंने अपने पति और बेटो के साथ जो खूबसूरत जीवन बिताया था उनको समझ ने की सोची।

द्रौपदी मुर्मू जी जिनका ससुराल पहाड़पुर गाओं में हे यंहा इन्होने होना घर को ही स्कूल में बदल दिया और उसका नाम रखा हे श्याम लक्समन एंड शिपुण मेमोरियल हायर सेकेंडरी स्कूल। द्रौपदी जी ने अगस्त 2016 में अपना घर को ही स्कूल में बदल दिए था। हर साल अपने बेटो और पति के पूर्णया तिथि में उन्होंने यंहा पे जरूर एते हैं। अपनी ो यद् से भी जीबन में मोटीवेट होते आये हे। आगे बढ़ती जा रहा हे और लोगो को मोटीवेट करते रहते हे।


 

 


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